नई दिल्ली.नरेंद्र मोदी मंगलवार को इजरायल दौरे पर रवाना हो रहे हैं। बीते 70 साल में इजरायल जाने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोदी के बीच डिफेंस, साइबर सिक्युरिटी समेत कई कई अहम करार हो सकते हैं। इजरायल में उन्हें यूएस प्रेसिडेंट और पोप जैसा सम्मान दिया जाएगा। यह भी पहली बार ही होगा कि मोदी के साथ नेतन्याहू ज्यादातर प्रोग्राम्स में साथ रहेंगे।
1. 70 साल के इतिहास और 25 साल के रिश्तों में पहली बार किसी पीएम की इजरायल विजिट
1950 में पहली बार भारत ने इजरायल को मान्यता दी लेकिन 1992 में नरसिम्हाराव सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशन बने।
1997 में मोरारजी देसाई सरकार ने इजरायल ने बेहतर कम्युनिकेशन शुरू किया। उस वक्त इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर भारत की सीक्रेट ट्रिप पर आए। 1985 में यूएन असेंबली से इतर राजीव गांधी अपने इजरायली काउंटरपार्ट शिमोन पेरेज से मिले।
1997 में इजरायल के पीएम एजर वीजमैन और 2003 में एरियल शेरोन भारत आए। 2003 में ही जसवंत सिंह का इजरायल दौरा हुआ।
मोदी से पहले कोई भी भारतीय पीएम इजरायल दौरे पर नहीं गया।
2. पहली बार पोप-यूएस प्रेसिडेंट के इतर किसी पीएम के सम्मान में रिसेप्शन देंगे नेतन्याहू
नेतन्याहू अपनी टॉप प्रोटोकॉल टीम के साथ मोदी को रिसीव करने के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद रहेंगे।
नेतन्याहू 4 जून को नेतन्याहू मोदी के सम्मान में डिनर देंगे। 5 जून को मोदी को कम्युनिटी डिनर दिया जाएगा।
भारत में इजरायल के एम्बेसडर डेनियल कार्मन के मुताबिक, जो सम्मान मोदी को दिया जाएगा वो केवल US प्रेसिडेंट और पोप को दिया जाता है।
3. पहली बार फिलीस्तीन के मुद्दे पर भारत का डिप्लोमैटिक शिफ्ट
भारत के इजरायल को मान्यता देने के 32 साल बाद डिप्लोमैटिक रिलेशन बने। क्योंकि भारत इजरायल के धुरविरोधी रहे फिलीस्तीन का समर्थन करता था।
इजरायल दौरे से ठीक पहले और बाद में मोदी फिलीस्तीन नहीं जाएंगे। यह कदम भारत की पहले की पॉलिसी से उलट है।
इससे पहले यह परंपरा थी कि भारतीय राजनेता बैलेंस बनाए रखने के लिए एक साथ दोनों देशों का दौरा करते थे।
यह भारत का इजरायल के साथ अपने रिश्तों को खुलेआम स्वीकार करना जैसा है। यानी दोनों ही देश एक-दूसरे के हितों को लेकर इंटरनेशनल मंच पर बात रखेंगे।
विदेश मामलों के एक्सपर्ट डॉ. रहीस सिंह के मुताबिक, “फिलीस्तीन ‘टू नेशन’ सिद्धांत को मानता है। ‘टू नेशन’ सिद्धांत के अनुसार गाजा पट्टी, यरुशलम और वेस्टबैंक एक साथ मिलकर फिलीस्तीन राष्ट्र होगा। इजरायल इसे नकारता है। चूंकि कश्मीर मसले पर इजरायल भारत के ‘वन नेशन’ सिद्धांत का समर्थन करता है इसलिए वह चाहेगा कि भारत भी ‘वन नेशन’ का समर्थन करे।”
“यह तो तय है कि भारत जो अब तक इजराइल के साथ रिश्तों को सामरिक स्तर पर तो तेजी से आगे बढ़ा रहा था। अब पॉलिटिकल डिप्लोमैसी को लेकर उसकी संकोच दूर हो चुकी है। यह भारत का चीन-पाकिस्तान और अरब देशों-पाकिस्तान की जुगलबंदी का रणनीतिक जवाब होगा।”
बता दें कि 2015 में प्रणब मुखर्जी और 2016 में सुषमा स्वराज दोनों देशों के दौरे पर गए थे।
4. पहली बार किसी वर्ल्ड लीडर के दौरे पर पूरे वक्त उनके साथ रहेंगे नेतन्याहू
ऐसा पहली बार होगा कि नेतन्याहू किसी वर्ल्ड लीडर के साथ ज्यादातर इवेंट्स में शामिल रहेंगे। नेतन्याहू एयरपोर्ट पर मोदी को रिसीव करने से लेकर कम्युनिटी की स्पीच तक कई प्रोग्राम्स में उनके साथ शामिल रहेंगे।
नेतन्याहू ने कहा था, “मेरे दोस्त, नरेंद्र मोदी इजरायल आ रहे है। ये उनका ऐतिहासिक दौरा होगा। 70 साल में कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल नहीं आया है। इस दौरे से मिलिट्री, इकोनॉमिक और डिप्लोमैटिक रिश्ते मजबूत होंगे।”
5. पहली बार विदेश में किसी टेरर विक्टिम से मिलेंगे मोदी
मोदी इजरायल में 26/11 के मुंबई हमलों के विक्टिम रहे होल्ट्जबर्ग मोशे से भी मुलाकात करेंगे।
बता दें कि मोशे उन दो लोगों में शामिल है जो मुंबई हमले में जिंदा बचे थे। मोशे को उसकी नानी सैंड्रा सेमुअल ने बचाया था। आतंकवादियों ने यहूदियों की बिल्डिंग नरीमन हाउस को भी हमले के लिए चुना था।
मुंबई हमले में 8 इजरायली मारे गए थे, जिसमें मोशे के पिता रब्बी ग्रेब्रियल और मां रिवाका भी थे।