नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति के लिए शनिवार को वोटिंग हो रही हैं। शाम तक रिजल्ट आ जाएगा। पहला वोट नरेंद्र मोदी ने डाला। एनडीए कैंडिडेट एम. और यूपीए के गोपालकृष्ण गांधी के बीच है। नायडू की जीत करीब-करीब तय है। दोनों सदनों में कुल 790 सांसद हैं। जीत के लिए 50% से एक ज्यादा वोट जरूरी है। एनडीए के पास लोकसभा में 338 और बीजेपी के राज्यसभा में 58 मेंबर हैं। मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को खत्म हो रहा है।
वोटिंग के पहले वैंकेया ने कहा, “मैं किसी पार्टी का नहीं हूं। ज्यादातर पार्टियां मेरी उम्मीदवारी का समर्थन कर रही हैं। उम्मीद करता हूं कि वे सभी मेरे लिए वोट करेंगे।”
“मैं किसी नेता या पार्टी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। मैं भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहा हूं।” “मैं संसद के सभी सदस्यों को जानता हूं, वे मुझे जानते हैं। इसलिए मैंने कैम्पेन नहीं किया। मैंने सभी को विनम्रता से लेटर लिखा, रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा। भरोसा है कि सभी मुझे सपोर्ट करेंगे।”
गोपालकृष्ण गांधी ने कहा, “सत्ता और विपक्ष दोनों को अधिकार है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार खड़े करें। एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ये चुनाव हो रहा है। इसमें लड़ाई का सवाल ही पैदा नहीं होता। हमारी राजनीतिक व्यवस्था ने ही ये मौका दिया है।”
मुक्तार अब्बास नकवी  ने कहा, “वेंकैया जी का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। उनके जीतने पर फायदा होगा।”
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, “कोई भी व्यक्ति संवैधानिक पदों पर चुनकर आता है तो वह किसी पार्टी का नहीं रह जाता। इस वक्त जो राजनीतिक स्थिति है, उसमें कांग्रेस के सांसद कम हैं। लेकिन ये हमारे लिए चिंता की बात नहीं है।”
1) शाम 5 बजे तक वोटिंग
इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। राजनीतिक दलों की तरफ से कोई व्हिप जारी नहीं किया गया है। इसकी वजह है कि वोट सीक्रेट बैलेट के जरिए डाले जाएंगे।
2) रिजल्ट कब आएंगे?
उपराष्ट्रपति पद की वोटिंग खत्म होने के ठीक बाद ही वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। शाम 7 बजे तक रिजल्ट का एलान कर दिया जाएगा। मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी लगातार दो टर्म से इस पद पर हैं। उनका टेन्योर 10 अगस्त को खत्म हो रहा है।
नए उपराष्ट्रपति 11 अगस्त को कार्यभार ग्रहण करेंगे और वर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को 10 अगस्त को सांसद विदाई देंगे।
3) कैसे होता है ये चुनाव?
राष्ट्रपति चुनाव के उलट इस चुनाव में विधायक वोट नहीं करते। सिर्फ राज्यसभा और लोकसभा के सभी सांसद वोटिंग करते हैं। सभी सांसद अपनी पसंद का उपराष्ट्रपति चुनने के लिए स्पेशल पेन का इस्तेमाल करते हैं। ये पेन इलेक्शन कमीशन देता है। अगर किसी सांसद ने कोई और पेन का इस्तेमाल किया है, तो उसका वोट रिजेक्ट कर दिया जाता है।
बैलेट पेपर पर कैंडिडेट्स का सिर्फ नाम होता है। कोई इलेक्शन सिंबल नहीं होता है।
वो कैंडिडेट जीतता है, जिसे कुल वोट के 50% से एक ज्यादा वोट मिलते हैं।
4) इस चुनाव में वोट कौन करता है? राज्यसभा:
इलेक्टेड: 233
नॉमिनेटेड: 12
लोकसभा:
इलेक्टेड: 543
नॉमिनेटेड: 02
कुल (233+12+543+02) = 790
उप राष्ट्रपति बनने के लिए 50% से एक ज्यादा यानी 396 वोट चाहिए।
लेकिन अभी अलग है स्थिति
लोकसभा में 545 मेंबर हैं, लेकिन 2 सीट खाली हैं। वहीं, बीजेपी सांसद छेदी पासवान को कोर्ट ने अयोग्य घोषित किया है। इस तरह 542 सांसद अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे।
वहीं, राज्यसभा में कुल 245 मेंबर हैं, लेकिन एक सीट खाली है। 244 सांसद वोट डालेंगे। यानी 542+244= 786 सांसद वोट डाल सकते हैं।
5) क्या है वोटिंग प्रोसेस?
उपराष्ट्रपति चुनाव में सांसद प्रिफरेंस के हिसाब से वोट करते हैं।
मान लीजिए इलेक्शन में चार कैंडिडेट A, B, C, D मैदान में हैं, तो वोटर को सभी कैंडिडेट को वोट देने होते हैं। एग्जाम्पल के लिए: D- को पहली पसंद बताया। B- को दूसरी, A- को तीसरी और C को चौथी।
फर्स्ट प्रिफरेंस वाले वोटों की काउंटिंग की जाती है। अगर पहली काउंटिंग में ही किसी कैंडिडेट को 396 या इससे ज्यादा वोट मिल जाते हैं तो वह जीत जीता है।
6) अगर क्लियर मेजॉरिटी नहीं मिली तो कैसे होगी काउंटिंग?
फर्स्ट प्रिफरेंस वोट की काउंटिंग में अगर किसी भी कैंडिडेट को जरूरी 396 या इससे ज्यादा वोट नहीं मिले तो फिर सेकंड प्रिफरेंस के वोट की काउंटिंग की जाती है। इसे ऐसे समझते हैं:
मान लीजिए:
फर्स्ट प्रिफरेंस में A को 290, B को 150, C को 190 मिले और D 160 वोट मिले। ऐसे में किसी को भी जरूरी 396 वोट नहीं मिले।
ऐसी स्थिति में इलेक्शन ऑफिसर सबसे कम वोट मिले कैंडिडेट को बाहर कर देता है। ऐसे में B कैंडिडेट बाहर हो जाएगा। अब ये देखा जाता है कि जिन 150 सांसदों ने B को वोट दिया है। उन्होंने सेंकड प्रिफरेंस वोट किसे दिया है।
अब इसे ऐसे समझें:
इन 150 सांसदों में से A को 108 सेंकड प्रिफरेंस वोट मिले। C को 22 मिले। D को 10 मिले। बाकी बचे 10 वोट उसने B को दिए थे, जो बाहर हो चुका है। इस हिसाब से फर्स्ट और सेकंड प्रिफरेंस के वोट मिलाने पर A को 398, C को 212 और D को 170 वोट मिले। इस तरह A को जीत के लिए जरूरी 396 वोट से 2 ज्यादा मिले। इसलिए A जीत जाएगा।
इससे भी नतीजा नहीं निकला तो सबसे कम वोट पाने वाले कैंडिडेट को बाहर करने का यह सिलसिला तब तक चलता रहता है, जब तक कि किसी एक कैंडिडेट को जरूरी वोट नहीं मिल जाते।
7) राज्यसभा में अभी किस पार्टी के कितने सांसद?
बीजेपी: 58, कांग्रेस: 57, सपा: 18, एआईएडीएमके: 13, टीएमसी: 12, जेडीयू: 10, बीजेडी: 8, सीपीआईएम: 8, नॉमिनेटेड: 8, टीडीपी: 6, इंडिपेंडेंट और अन्य: 6, बीएसपी: 5, एनसीपी: 5, डीएमके: 4, टीआरएस: 3, आरजेडी: 3, शिवसेना: 3, एसएडी: 3, पीडीपी: 2, जेडीएस: 1, जेएमएम: 1, केरला कांग्रेस (एम): 1, इंडियन नेशनल लोक दल: 1, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग: 1, सीपीआई: 1, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट: 1, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट: 1, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया: 1, नगा पीपुल्स फ्रंट: 1, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी: 1।
लोकसभा में एनडीए के पास 338 मेंबर हैं। बीजेपी के पास 281 हैं।