ई दिल्ली/सूरत.वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री की बड़ी मांग मान ली है। इंडस्ट्री से जुड़े हर तरह के जॉब वर्क पर सिर्फ पांच प्रतिशत टैक्स लगेगा। पहले फैब्रिक पर 5%, लेकिन गारमेंट के जॉब वर्क पर 18% जीएसटी रेट तय किया गया था। इंडस्ट्री इसे कम करने की मांग कर रही थी। वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट पर टैक्स रेट भी 18% से घटाकर 12% कर दिया गया है। इसका इनपुट क्रेडिट भी मिलेगा। काउंसिल ने कुछ ट्रैक्टर पार्ट्स पर टैक्स रेट 28% से घटाकर 18% कर दिया है।
शनिवार को जेटली की अध्यक्षता में  जीएसटी काउंसिल की बैठक में ये निर्णय हुए। गुड्स ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े ई-वे बिल को भी अंतिम रूप दिया गया। इसके तहत अगर कोई कारोबारी 50,000 रुपए से ज्यादा का माल 10 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ले जाना चाहता है तो उसे माल का पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा।
टैक्स से छूट वाली वस्तुओं (जैसे अनाज) के लिए ई-वे बिल जरूरी नहीं होगा। जेटली ने कहा कि ई-वे बिल लागू करने की तारीख की घोषणा जल्दी की जाएगी। काउंसिल की अगली बैठक 9 सितंबर को हैदराबाद में होगी। सूत्रों के अनुसार ई-वे बिल लागू करने की घोषणा 1 अक्टूबर से की जा सकती है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली  71 लाख पुराने कारोबारी जीएसटी नेटवर्क पर माइग्रेट हो चुके हैं। सेंट्रल एक्साइज, सर्विस टैक्स और स्टेट वैट में पहले करीब 80 लाख कारोबारी रजिस्टर्ड थे। इनके अलावा नए रजिस्ट्रेशन के 15.67 लाख आवेदन मिले हैं। उन्होंने कारोबारियों से कम टैक्स का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने का आग्रह किया। ऐसा नहीं करने पर मुनाफाखोरी नियमों के तहत कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी।
10 हजार करोड़ का नुकसान भी हुआ सरलीकरण तक की बात नहीं मानी
जीएसटी काउंसिल की 20वीं बैठक से भी सूरत को कोई राहत नहीं मिली। कपड़ा व्यापारियों की किसी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। फोस्टा के सचिव चंपालाल बोथरा ने कहा कि व्यापारी नाराज हैं।
कपड़ा पर जीएसटी हटाने के लिए व्यापारियों ने 22 दिन दुकानें बंद रखीं। 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान सहा।
वीवर, एंब्राॅयडरी और प्रोसेसिंग का काम प्रभावित हुआ। ट्रांसपोर्ट कारोबार भी रुक गया, फिर भी सरकार ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया।
बोथरा ने कहा कि काउंसिल की मीटिंग से पता चल गया कि हमारे प्रतिनिधि दिल्ली में साजिश करने गए थे। उन्होंने हमारी मांगें रखी ही नहीं।
जीएसटी को समझने के लिए कम से कम डेढ़ साल का समय मिलना चाहिए था। मुझे नेतृत्व मिला तो जीएसटी हटाकर ही रहूंगा।