नई दिल्ली. प्रधानमंत्री बनने के बाद से यह पहला मौका रहा जब नरेद्र मोदी को अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों के अनमनेपन का सामना करना पड़ा। एक सितंबर की रात गृहमंत्री राजनाथ सिंह नितिन गडकरी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज की बैठक में हुई बातें अब सामने आई हैं। मोदी, सरकार में सुविधा के लिहाज से बड़े मंत्रियों से और ज्यादा समर्पण चाहते थे, लेकिन राजनाथ सिंह ने वृंदावन के केशवधाम में चल रही संघ और उसके आनुषंगिक संगठनों की बैठक में यह संदेश भिजवाया कि वे चाहते हैं कि मंत्री पद की जगह संगठन में काम करें, ताकि खुलकर काम करने की आजादी मिले। बता दें कि रविवार को हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में 4 कैबिनेट समेत 13 मंत्रियों ने शपथ ली।
 करीब तीन घंटे चली बात…
राजनाथ का संदेश वृंदावन उस समय पहुंचा जब पार्टी और संघ दाेनों का शीर्ष नेतृत्व मौजूद था।
इसके बाद शाम को गडकरी, सुषमा और जेटली राजनाथ के घर पहुंचे। करीब तीन घंटे बातचीत चली।
इसमें आम राय यह थी कि वे साढ़े तीन साल से अपने मंत्रालय जिम्मेदारी से चला रहे हैं। कार्यकाल के अंतिम दौर में वे अपने मंत्रालय छोड़कर दूसरे मंत्रालयों में जाते हैं तो चुनाव के समय उनके कामों का श्रेय दूसरों को जाएगा।