रायपुर(छत्तीसगढ़).  लोगों की मदद करने और फेमस सेलेब्रिटी लेडी कॉन्स्टेबल स्मिता तांडी के साथ ट्रेन में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। उनके किए ट्वीट में उन्होंने खुद इस बात को शेयर किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25-26 तारीख को बिलासपुर से वापसी में साउथ बिहार एक्सप्रेस में सफर के दौरान स्मिता से ये छेड़खानी की घटना हुई। जिसके बारे में उन्होंने ट्वीट किया।

स्मिता ने पहले ट्वीट किया, “साउथ बिहार एक्सप्रेस में मेरे साथ बदतमीजी हो रही है, यह ट्रेन अभी तिल्दा पहुचने वाली है, ट्रेन की गंरल बोगी में…”

उसके कुछ देर बाद वे दूसरा ट्वीट करती हैं, “मेरे साथ ट्रेन में बदतमीजी हो रही है साउथ बिहार एक्सप्रेस में, यह ट्रेन थोड़ी देर में भाटापारा पहुचने वाली है…”

उनके तीसरे ट्वीट में वे लिखती हैं, “अभी परिस्थिति सामान्य हो चुकी है, अगली अपडेट आपको जल्द ही दी जायेगी…. Post by Team Jivandeep…”

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आरपीएफ ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए छेड़खानी के आरोपी को धर दबोचा। हालांकि, इस मामले की पूरी तरह तस्दीक नहीं हुई है कि पूरा मामला क्या है।

 

डेढ़ साल में फेसबुक पर बनाए 8 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स…

छत्तीसगढ़ पुलिस की महिला सिपाही स्मिता तांडी सोशल मीडिया काफी फेमस हैं। वह छत्तीसगढ़ की सेलिब्रिटी हैं। फेसबुक पर उनके 83,6,075 लाख फॉलोअर्स हैं।

खबरों के मुताबिक पूरे छत्तीसगढ़ में सिर्फ सीएम डॉ रमन सिंह ही वे शख्स हैं जिनकी फॉलोइंग इस कॉन्स्टेबल से ज्यादा है। उन्होंने 2011 में छत्तीसगढ़ पुलिस ज्वाॅइन की थी।
मदद के लिए ही बनाया था अकाउंट

स्मिता के पिता भी पुलिस में थे। 2013 में जब वे पुलिस ट्रेनिंग ले रही थीं, तब घर पर उनके पिता की तबीयत खराब हो गई। स्मिता के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे, इसके चलते उनके पिता की मौत हो गई। पिता की मौत से स्मिता ने महसूस किया कि देश में हजारों लोग पैसों कमी के चलते अपनी जान गंवा देते हैं। उसके बाद स्मिता ने गरीबों की मदद करने की ठानी और इस मिशन में जुट गई।

इस तरह की पब्लिसिटी के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन स्मिता का कहना है कि उनके फॉलोअर्स पेड नहीं हैं। उनका मानना है कि उनकी पोस्ट के कंटेंट की वजह से लोग उनसे जुड़ते हैं। स्मिता अपनी पोस्ट्स के जरिए जरूरतमंद लोगों की कहानी सामने लाती हैं और लोगों से मदद की अपील करती हैं।

 

2014 में बनाया ग्रुप

स्मिता ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर 2014 में गरीबों की मदद के लिए एक ग्रुप बनाया। इस ग्रुप के जरिए उन्होंने पैसा जमा करना शुरू किया।
स्मिता और उनके दोस्त उन लोगों की मदद करते थे जिन्हें जानकारी की कमी के चलते सरकारी मदद नहीं मिल पाती। इसके बाद उन्होंने फेसबुक का सहारा लिया।
शुरुआत में लोग उनकी पोस्ट पर उतना ध्यान नहीं देते थे।करीब एक महीने बाद रिस्पॉन्स मिलना शुरू हो गया। स्मिता का कहना है कि शायद शुरू में लोग उसे फर्जी मानते थे।

स्मिता की फेसबुक प्रोफाइल पर अनेक कहानियां पढ़ी जा सकती हैं जिन्हें मदद पहुंची या पहुंचाने की कोशिश हुई। उनकी पब्लिसिटी को देखते हुए अफसरों ने उन्हें उन्हें भिलाई में महिला हेल्पलाइन के सोशल मीडिया सेल में रखा है।