मुंबई का शुभम रहा आकर्षण

किड्ज मैराथन में मुंबई का शुभम आकर्षण का केन्द्र रहा। धावक पिता का धावक बेटा शुभम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। चार वर्ष की उम्र से दौडऩे वाले शुभम ने पांच वर्ष की उम्र में पहली बार एक किमी की मैराथन में भाग लिया था। उसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ उसने शुभम को मुम्बई का यंगेस्ट मैराथन रनर बना दिया। शुभम के पिता अजय जोशी भी स्टेट लेवर रनर रहे हैं और उनके मार्गदर्शन में ही शुभम दौड़ की कला में पारंगत हो रहा है। स्टेट लेवल पर ५० मीटर रेस में सिल्वर और ५० मीटर रिले में गोल्ड का तमगा शुभम को मिल चुका है। यही नहीं वह मुम्बई का अकेला मैराथन धावक है जो १५ वर्ष से कम की उम्र के बावजूद १० किमी मैराथन में भाग लेता है। शुभम ने अब तक ३० से ज्यादा मैराथन में भाग लिया है।

शुभम को दौडऩे का शौक तो पहले से ही था, लेकिन भाग मिल्खा भाग फिल्म ने उसके शौक को प्रेरणा दी। शुभम के पिता उसे स्पोट्र्स फिल्म देखने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। पढ़ाई और अन्य एक्टिविटीज के साथ ही शुभम खिलाडिय़ों की बायोपिक्स भी बड़े ध्यान से देखता है।

 

किड्ज मैराथन दौड़ में नन्हें नन्हें बच्चों के साथ उनके अभिभावकों भी दौडऩा था, ऐेसे में अभिभावक अपने बच्चें को जीताने की होड़ में बच्चों को दौडऩे के लिए खिंचते नजर आए। इस दौरान कई बच्चें और अभिभावक गिर गए और उन्हें सामान्य चोट भी पहुंची।