मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश की माया विश्वकर्मा और उत्तर प्रदेश की ऊषा विश्वकर्मा दो ऐसे नाम हैं जिन्होंने महिला सुरक्षा के लिये अन्तरराष्ट्रीय ख्याति हासिल की है। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संगठनों द्वारा अपने—अपने क्षेत्र में महारत हासिल करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। इन्हीं महिलाओं में विश्वकर्मावंश की दो महिला माया व ऊषा भी हैं जो किसी पहचान की मोहताज नहीं। दोनों ही ‘महिला सुरक्षा’ पर कार्य कर रही हैं बस तरीका अलग है। माया को ‘पैड वूमन’ तो ऊषा को ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जाना जा रहा है।

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की निवासी माया विश्वकर्मा ने महिलाओं की आन्तरिक समस्या को अपना मिशन बनाया तो उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी ऊषा विश्वकर्मा ने बाहरी समस्या को अपना मिशन बनाया। माया विश्वकर्मा ने महिलाओं के पीरियड्स के दर्द को समझा और उससे होने वाले संक्रमण से बचाव के लिये पैड बनाने, सस्ता बेचने व बांटने का काम शुरू किया। उनके इस प्रयास व चलाये जा रहे जागरूकता से महिलओं को आन्तरिक समस्या से निजात मिल सकेगी। ​पीरियड्स के दौरान होने वाले संक्रमण से महिलाओं की जान को खतरा बन जाता है। माया ने उसी संक्रमण से बचाव के लिये ‘सुकर्मा फाउण्डेशन’ की स्थापना कर अपने मिशन को आगे बढ़ा रही हैं।
लखनऊ निवासी ऊषा विश्वकर्मा ने महिलाओं को बाहरी व अराजक तत्वों से बचने के लिये प्रशिक्षण देने का काम शुरू किया। वह ‘रेड ब्रिगेड’ के नाम से एक संस्था बनाकर कार्य कर रही हैं जो आज पूरी दुनिया में जाना जाता है। ऊषा एक अन्तरराष्ट्रीय ट्रेनर के रूप में जानी जाती हैं। वह ​स्कूल की लड़कियों, महिलाओं, यहां तक कि महिला पुलिस कर्मियों को भी सुरक्षा के टिप्स और ट्रेनिंग देती हैं। ऊषा यह कार्य कई वर्षों से करती आ रही हैं जिसके लिये उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं।