Gujarat Nonstop : मध्य प्रदेश की नई सरकार को 2,200 करोड़ रुपये का पेमेंट 19 जनवरी के बाद करनी होगी। हालांकि, नई सरकार इस स्कीम को पुरानी सरकार का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ सकती है। लेकिन, आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र यह उसके लिए घातक साबित हो जाएगा।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है। लेकिन, प्रदेश की गद्दी को संभाले रखना कांग्रेस के लिए आसान नहीं रहने वाला है। क्योंकि, चुनाव से ठीक पहले शिवराज सरकार की घोषणाएं उसके गले की फांस बन सकती हैं। किसानों की फसलों की खरीद पर बोनस का ऐलान अब कांग्रेस के लिए चुनौती साबित होने जा रहा है। अगर कांग्रेस इस हालात को सही ढंग से मैनेज नहीं करती है तो इसका सीधा खामियाजा 2019 लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है।

दरअसल, चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले 5 अक्टूबर को शिवराज सरकार ने घोषणा की थी कि किसानों को सोयाबीन और मक्के की फसल पर प्रति-क्विंटल 500 रुपये का बोनस दिया जाएगा। क्रय केंद्रों पर इसकी खरीद की तारीख भी 20 अक्टूबर, 2018 से 19 जनवरी, 2019 तक निर्धारित की गई है। जानकारी के मुताबिक 10 दिसंबर तक 15.29 लाख टन सोयाबीन और 9.96 लाख टन मक्का राज्य सरकार की 257 मंडियों में बेचे जा चुके हैं। व्यापारिक सीजन के आखिर तक अनुमान के मुताबिक 28 लाख टन सोयाबीन और 16 लाख टन मक्का बेच दिया जाएगा। इतनी फसल खरीद पर लगने वाले बोनस का बोझ  2,200 करोड़ रुपये आ सकता है।

मध्य प्रदेश की नई सरकार को 2,200 करोड़ रुपये का पेमेंट 19 जनवरी के बाद करना है। अगर वह यह इस स्कीम से पुरानी सरकार का हवाला देकर पल्ला झाड़ती है तो आगामी लोकसभा चुनाव में स्थिति खराब हो सकती है। वहीं, इस पर अगर पूरी तरह अमल करती है, तो उसके पास फंड की कमी आड़े आएगी। क्योंकि, कांग्रेस के पास भी चुनाव पूर्व किए गए खर्चीले घोषणाओं को पूरा करने की चुनौती है।

कांग्रे ने सरकार गठन के 10 दिनों के भीतर लोन-माफी की बात कही थी। जब प्रदेश में पहले से खर्च का अंबार लगा है, ऐसे में किसानों के 2 लाख रुपये तक की ऋण और बिजली माफी एक बड़ी चुनौती है। ऊपर से 17 कृषि उत्पादों पर बोनस देने का वादा भी कांग्रेस ने किया है। साथ ही साथ वादों के मुताबिक ‘व्यापम’ जैसी विवादित संस्था को भी बंद करने की चुनौती कांग्रेस के सामने रहेगी।

कांग्रेस ने चुनाव से पूर्व ताबड़तोड़ कई ऐसे धार्मिक वादे किए हैं जो उसके लिए गले की फांस बन सकते हैं। अगर इन वादों के संबंध में मतदाता जरा भी ठगा हुआ महसूस किया तो 2019 की गणित कांग्रेस के लिए बिगड़ सकती है। जैसे कांग्रेस ने धार्मिक आस्थाओं को लेकर भी बड़े वादे किए हैं। इनमें ‘राम वन गमन पथ’, हर पंचायत में गऊशाला का निर्माण, गाय के मूत्र का कर्मशल इस्तेमाल और आध्यात्मिक डिपार्टमेंट खोलना शामिल है।