सवर्ण आरक्षण बिल लोकसभा से पास हो चुका है।

नई दिल्ली। सवर्ण समाज को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान करने के बाद मोदी सरकार के सामने इस बिल को राज्यसभा से पास कराने की चुनौती बनी हुई है। मंगलवार को लोकसभा में ये बिल पास हो गया था और बुधवार को राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा चल रही है। हालांकि सरकार ने ये उम्मीद जाहिर की है कि लोकसभा की तरह राज्यसभा में बिल को पास करा लिया जाएगा।

सवर्ण आरक्षण बिल के समर्थन में टीडीपी

राज्यसभा में कई राजनीतिक दलों ने इस बिल का समर्थन किया है, लेकिन बिल का विरोध करने वाले भी नजर आ रहे हैं। खास बात ये है कि बुधवार को राज्यसभा में आरक्षण बिल के समर्थन में टीडीपी भी नजर आई। टीडीपी सांसद वाईएस चौधरी ने बिल का समर्थन किया। आपको बता दें कि टीडीपी ने हाल ही में एनडीए का साथ छोड़ा था, लेकिन इसके बाद भी चंद्रबाबू नायडू की पार्टी ने सवर्ण आरक्षण बिल का समर्थन किया है।

बस बिल को लाने में देर की गई है- टीडीपी सांसद

सदन में टीडीपी के सांसद वाई. एस. चौधरी ने कहा कि यह बिल अच्छा है, लेकिन बहुत देरी से लाया गया है, इस बिल को काफी पहले ही लेकर आ जाना चाहिए था। वाईएस चौधरी ने कहा कि बिल के लिए संसदीय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ की गई है और जल्दबाजी में यह बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह बिल मददगार साबित होगा। इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए था।

राज्यसभा में किसने किया विरोध और किसने समर्थन

टीडीपी के अलावा राज्यसभा में जेडीयू ने भी बिल का समर्थन किया है। ओडिशा की बीजेडी ने भी बिल का समर्थन किया है। इसके अलावा राज्यसभा में AIADMK ने बिल का विरोध किया और सदन से वॉकआउट भी किया। AIADMK सांसद ए. नवनीतकृष्णन ने कहा कि इस बिल से तमिलनाडु को बहुत ही नुकसान होगा। राज्यसभा में बिल का विरोध करने वालों में RJD भी शामिल है। सदन में सांसद मनोज कुमार झा ने बिल का विरोध करते हुए झुनझुना भी दिखाया।

लोकसभा में पास हो चुका है बिल

टीडीपी से पहले लोकसभा में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस बिल का समर्थन किया है। हाल ही में एनडीए से अलग हुए उपेंद्र कुशवाहा ने भी लोकसभा में सवर्ण आरक्षण बिल का समर्थन किया था।