Surat : 2016 में प्रभात तारा स्कूल के का लाइसेंस रद्द होने के बाद भी ट्रस्टी और संचालक मिलकर स्कूल में एडमिशन चालू रखा, और 10,12 वी के छात्रों को प्रवेश देकर उन्हें अंधरे की कोठरी में शिक्षा तो दे दी, पर एग्जाम का कोई ठिकाना नही, कोई मान्यता न होने के बाद हालात धीरे – धीरे  गरमा रहा था ।
बोर्ड एग्जाम आने के बाद जब बच्चो को हॉल टिकिट नही मिला तो सभी के परिवार वालो ने हंगामा सुरु कर दिया, मामला DEO तक पहुँच गया । जब इस स्कूल की जांच की गई तो पता चला कि 2016 में इस स्कूल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है ।
स्कूल और ट्रस्टी के खिलाफ रांधेर पुलिस स्टेशन में मामला में दर्ज तो किया लेकिन हाईकोर्ट में अगोतारा ले लिया
जब इस स्कूल का मामला मीडिया में आया तो तंत्र और अधिकारी हरकत में आ गए और ट्रस्टी और संचालक के खिलाफ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रहे थे । लेकिन स्कूल ट्रस्टी पहले से अपना रास्ता साफ करने के लिए अगोतरा जमीन के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया,
50 बच्चो के भविष्य की चिंता राजनीति दल तक पहुँच गया । भारतीय जनता पार्टी के विधायक पुरनेश मोदी ने अस्वासन देकर परिवार को समझाया और कुछ परिवार को लेकर  गांधी नगर रवाना हो गए थे । राज्य सरकार ने यह फैसला एयर प्रेस नोट जाहिर कर बताया कि इन बच्चो की परीक्षा (NOS) नेशनल ओपन स्कूल से देने बात कही, भारतीय जनता पार्टी के मंत्री को मौका मिल गया कैसे चुनावी मुद्दा को अपने हाथ मे लेने का, दरअसल नेशनल ओपन स्कूल में कोई छात्र एडमिशन ले सकता है उसके लिए किसी सहारा लेने की जरूरत नही होती है । कई की वह घर बैठे पढ़ाई की जाती है ।
दो दिन पहले गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा ने साफ कह दिया था । कि इनकी परीक्षा नही ली जा सकती है । कोर्ट की गरिमा को देखते हुए शिक्षा मंत्री की ओर से कोई रास्ता नजर नही आया था । लिहाजा दूसरा रास्ता दिखाई दिया, अब एक ही रास्ता था, वह NOS में प्रवेश लेकर जून में परीक्षा देने का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया ।
हाईकोर्ट के हुक्म के बाद सूरत सेशन कोर्ट ने कुछ शर्त रखकर आरोपियो को जमीन मुक्त कर दिया । शर्त में सभी बच्चो को 50 हजार रुपये, एक साल की फीस वापस देने को फरमान सुनाया यनि कुल मिलाकर करीबन 3 करोड़ चुकाना पैड सकता है । इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा की जब तक जांच नही पूरी होती तब तक किसी भी डॉक्यूमेंट के साथ छेड़छाड़ न हो, और स्कूल के ट्रस्टी और संचालक के पास पोर्ट जमा कर लिए जाय,
यह सभी प्रकार की घोषणा पत्र जारी करने के बाद अब क्या बच्चो के परिवार जन इस बात पर राजी हो जाते है । फिर मामला आगे बढ़ सकता है देखने वाली बात होगी ।