सूरत के साढ़े तीन साल की इकलौती लाड़ली बिटिया के माता पिता ने जब ब्रेनडेड बेटी के अंगदान करने का निर्णय लिया तो अन्य तीन बच्चो को नया जीवन दान मिला। यही नहीं दीजा नाम की इस बच्ची ने जब जीवन त्यागा तो उसके दान किए नेत्रों से अन्य दो लोगो को जीवन में रौशनी आ गई।
अपने साढ़े तीन साल की ब्रेनडेड बिटिया को अपनी आँखों के सामने देखने के लिए पत्थर का कलेजा चाहिए और उससे भी महत्वपूर्ण ये की अपनी इकलौती ब्रेनडेड बिटिया के अंगदान करने का निर्णय लेने का मजबूत मनोबल भी व्यक्ति के अंदर उसी समय हो। सुरत के गोलवाला परिवार के इस निर्णय के कारण पांच लोगो को नया जीवन मिला।
11 मार्च के दिन गोलवाला परिवार पर दुःखो का पहाड़ तब गिरा जब घर की इकलौती बिटिया दीजा को अचानक मिर्गी का दौरा आ गया । साढ़े तीन साल की दीजा को अस्पताल में इलाज के लिए दाखिल किया गया । दीजा को साँसे लेने में तकलीफ होने लगी । जिसके चलते डॉक्टरों की टीम ने उसे वेंटिलेटर पर रखा । सीटी स्केन की रिपोर्ट में आया की वह दीजा के दिमाग में पानी भर गया है । जिससे न्यरो सर्जन ने उसे ब्रेनडेड घोषित कर दिया
सूरत में अंगदान के लिए लोगो को जागृत करने वाली संस्था डोनेट लाइफ ने दीजा के माता पिता को दीजा के अंगदान करने के लिए समझाया आखिर में दीजा के माता-पिता ने दीजा के अंगदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिय। दीजा के अंगदान के कारण आज तीन अन्य बच्चो को जीवनदान मिला है । दीजा की एक किडनी पोरबंदर के 8 साल क्र गोकुलेश, दूसरी किडनी अमदाबाद के 6 साल की रितिका और लीवर विसनगर के 5 साल के श्रेय को में ट्रांसप्लांट की गई। जबकि दीजा के दो नेत्रों से दो लोगो के जीवन में उजाला आया।
दीजा के पिता उर्विश ने बताया कि, वह स्कुल के डांस कॉम्पिटिशन में जित गई थी वह पुरस्कृत की जाने वाली थी। लेकिन ओर्गेन निष्फलता के कारण अब वह दूसरों को अपना अंग इनाम के रूप में देकर चली गई । बेटी के जाने का दुःख क्या होता है वो कोई पिता शब्दो में नहीं बता सकता। उसे लेकर कई सपने देखे थे मैंने। मेरी बेटी बहादुर थी उसने जाते जाते कई लोगो को जीवनदान दिया है।