प्रत्‍येक वर्ष 21 मार्च केे‍ दिन को विश्‍व वन दिवस (World Forest Day) के रूप मेें मनाया जाता है इस दिवस को मनाने को उद्देश्‍य लेागों को वनों का महत्‍व समझाना और उनका संरक्षण करना है लेकिन डांग के जंगलों में ग्लोबल वार्मिंग से औषधीय वनस्पति नष्ट हो रही है ।
ग्लोबल वार्मिंग की समस्या मुह बाये खड़ी है और मनुष्य जाति उसके सामने आज विवश नजर आ रही है । वर्तमान समय मे गुजरात के डांग के जंगलों में  पहाड़ों की परंपरा और रीतिरिवाजों से जुड़ी वन औषधि कंडाली विलुप्त होती जा रही है।  अलग अलग नाम से प्रसिद्ध  औषधि पर ग्लोबल वार्मिंग का सबसे ज्यादा असर पड़ा है।वैसे तो भारत भरमे ओं पेपर  550 जितनी ऐसी वनस्पतियाँ है जो मनुष्य के जीवन में औषधि के रूप में काम आती है ।
मगर डांग में करीबन 700 वनस्पतियाँ है जो केंसर , डायाबिटिस, शर्दी जुखाम , टी.बी जैसे रोगों के लिए काम आती है । मगर आज ग्लोबल वार्मिंग के चलते ये सभी वनस्पतियाँ नष्ट होती जा रही है । जानकारों का मानना है की यहाँ के आदिवासिओं पिछले 5000  साल से इस औसधियाँ का इस्तेमाल करते आये है मगर आज धीरे धीरे  औषधीय वनस्पतियाँ कम होती जा रही है ।
पर्यावरण विंद रमेश पटेल का कहना है कि यहाँ पर वांस के जो पैड है वो भी दवाएं बनाने में कम लगते है मगर बढ़ता जा रहा तापमान के चलते वांस का पैड शुखता जा रहा है औऱ वांस के पैड से जमीन ठंडी रहती है ओर जो औषधीय वनस्पतियाँ को बचाने में काफी मददरूप होते है । मगर आज जंगलों में तापमान के चलते नष्ट होते जा रहे है जिससे जमीन में ठंडक नहीं होती है  और कंदमूल एवं एनी वनस्पतियाँ नष्ट होती जा रही है |