नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक अजीबोगरीब मामला सुनवाई के लिए आया, जिसमें पिटीशनर सुनील कुंडू और चीफ जस्टिस जेएस खेहर के बीच अनोखी बातचीत हुई। दरअसल, सुनील ने कैग (सीएजी) को आयकर विभाग सरीखी शक्तियां और अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी।
 सुनील ने कहा, “जज साहब मैं गरीब आदमी हूं, अपनी बात खुद रखना चाहता हूं। मुझे अंग्रेजी भी नहीं आती, इसलिए मैं अपनी बात हिंदी में रखना चाहता हूं।”चीफ जस्टिस खेहर ने कहा कि आप हिंदी में अपनी बात रख सकते हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा, “सरकार ने आयकर विभाग को दोषियों पर सीधे कार्रवाई का अधिकार दिया है। ऐसी ही शक्तियां कैग को भी दी जानी चाहिए।” चीफ जस्टिस बोेले, “हर किसी की अपनी सीमाएं होती हैं। सरकार और न्यायपालिका की भी अपनी सीमाएं हैं। कौन-सी एजेंसी कैसे काम करेगी, उसके पास क्या अधिकार व शक्तियां होनी चाहिए, यह तय करने का काम हमारा नहीं है।”
देश की बदहाली देखी नहीं जाती: पिटीशनर
इसके बाद याचिकाकर्ता बोला, “सर, देश में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है। अगर आप कुछ नहीं करेंगे तो कैसे काम चलेगा? देश कहां जा रहा है? मैं देश की दुर्दशा होते हुए देखता हूं तो मेरा दिल दुखता है।”
चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि आपको देश की इतनी चिंता है तो आप चुनाव क्यों नहीं लड़ते? आप नेता क्यों नहीं बन जाते? आप चुनाव लड़िए, नेता बन जाइए और फिर देश की सेवा कीजिए। जैसा आप चाहते हैं, देश को वैसा बनाइए।
याचिकाकर्ता ने कहा कि साहब, चुनाव लड़ने और नेता बनने के लिए पैसा लगता है। मेरे पास इतना पैसा नहीं है।
चीफ जस्टिस बोले, “चुनाव लड़ने के लिए पैसा होना जरूरी नहीं है। देश में ऐसे कई उदाहरण हैं। एक पत्थर तोड़ने वाली महिला ने विकास के लिए चुनाव लड़ा था और वह सांसद बन गई। उसके पास तो दो जून की रोटी के लिए पैसा नहीं था। आप चुनाव लड़िए, नेता बनिए। फिर आप वो सब कर सकते हैं, जिसके लिए आप कोर्ट आए हैं।”
 ऐसा कोई केस लाए तो जुर्माना लगेगा
चीफ जस्टिस की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच ने सुनील की पिटीशन खारिज करते हुए हिदायत भी दी। कहा, “आपने पहली बार पिटीशन दायर की है। इसलिए जुर्माना नहीं लगा रहे। लेकिन अगर भविष्य में इस तरह का कोई मामला लेकर आए तो आप पर जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसी याचिकाओं से अदालत का समय बर्बाद होता है।” इसके बाद याचिकाकर्ता कोर्ट से चला गया।